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पृष्ठ 50 - रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना
प्रतिनिधि द्रव्य
- बज्राभावे वैकान्त– वज्र के अभाव में वैकान्त का प्रयोग करना चाहिए।
- स्वणाभावे सुवर्ण माक्षिक– स्वर्ण के अभाव में स्वर्ण माक्षिक का प्रयोग करना चाहिए। वज्र का रत्न वर्ग, वैकान्त, महारस वर्ग, स्वर्ण धातु वर्ग तथा स्वर्ण माक्षिक महारस वर्ग में वर्णित है।
4. प्रक्रिया परिभाषा
शोधन
उद्धृतैरौषधैः सद्धि क्रियते पेषणादिकम् । मलविच्छित्तये यतु शोधनं तदिहोच्यते ॥
(र.त. 2/52)
किसी द्रव्य के मल को दूर करने के हेतु उसके लिए कही गयी औषधियों के साथ पेषण (पीसना), स्वेदन, प्रक्षालन आदि प्रक्रिया को करना ही शोधन कहलाता है।
विमर्श– रसशास्त्र की शोधन प्रक्रिया से यद्यपि सामान्य रूप से मल दूर करने का ही ग्रहण किया जाता है, परन्तु शोधन निम्न उद्देश्यों से भी किया जाता है–
- मल दूर करने हेतु– उदाहरण पारद का शोधन, गन्धक आदि का शोधन।
- भस्म निर्माण हेतु करने हेतु– जैसे धातुओं का सामान्य शोधन में धातु छोटे टुकड़ों में विभक्त हो जाती है जिससे मारण प्रक्रिया में आसानी होती है।
- विषों की उग्रता कम करने हेतु– विष द्रव्यों की उग्रता कम करने हेतु उनका शोधन किया जाता है तथा इन्हें चिकित्सार्थ प्रयुक्त किया जाता है।
शोधन के भेद
रसशास्त्रीय ग्रन्थों में शोधन के दो प्रकारों का उल्लेख मिलता है–
1. सामान्य शोधन, 2. विशेष शोधन
सामान्य शोधन वह शोधन विधि है जो एक वर्ग के द्रव्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। जिसका उदाहरण निम्न है–
१. सूर्यावर्तककदली वन्ध्या कोशातकी च सुरदाली । शिग्रुश्च वज्रकन्दो नीरडूणा काकमाची च ॥
आसामेकरसेन तु लवणक्षाराम्लभाविता बहुशः । शुद्ध्यन्ति रसोपरसा ध्माता मुच्चन्ति सत्त्वानि ॥
(र.र.स. 3/118-19)
सूर्यावर्तक, केला, वंध्या कर्कोटकी, देवदाली, शिग्रु, वज्रकन्द (जंगली सूरजकन्द), जलिपप्पली, मकोय, इनमें से किसी एक के स्वरस की भावना लवण, क्षार और अम्ल इन द्रव्यों से रस और उपरस को अनेक बार देने से रस और उपरसों का शोधन हो जाता है तथा इनके सत्व निकल जाते हैं।
सारांश (Summary in Simple Language)
| विषय | विवरण |
|---|
| प्रतिनिधि द्रव्य | मुख्य द्रव्य न होने पर उसके स्थान पर प्रयुक्त द्रव्य (वज्र के स्थान पर वैकान्त; स्वर्ण के स्थान पर स्वर्ण माक्षिक) |
| शोधन | किसी द्रव्य की अशुद्धियाँ दूर करने की प्रक्रिया |
| शोधन के उद्देश्य | (1) मल दूर करना (2) भस्म निर्माण हेतु (3) विषों की उग्रता कम करना |
| शोधन के प्रकार | सामान्य शोधन और विशेष शोधन |
| सामान्य शोधन के द्रव्य | सूर्यावर्तक, केला, वंध्या कर्कोटकी, देवदाली, शिग्रु, वज्रकन्द आदि |
| संदर्भ ग्रन्थ | र.त. (रस तरंगिणी) 2/52 और र.र.स. (रस रत्न समुच्चय) 3/118-19 |