Explain above paragraph in hindi pointwise
जब ये तीनों एक साथ ज्ञान में आते हैं, तब उसे सविकल्पक प्रत्यक्ष ज्ञान कहते हैं।
| प्रकार | उप-प्रकार |
|---|---|
| १. लौकिक सविकल्पक प्रत्यक्ष | (क) बाह्य लौकिक प्रत्यक्ष, (ख) आभ्यंतर लौकिक प्रत्यक्ष |
| २. अलौकिक सविकल्पक प्रत्यक्ष | - |
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Savikalpaka Pratyaksha Padartha Vigyana BAMS first year detail in Hindi
सविकल्पक प्रत्यक्ष पदार्थ विज्ञान आयुर्वेद BAMS Determinate Perception types laukika alaukika
"स प्रकारकं ज्ञानं सविकल्पकं यथा डित्थो अयं ब्राह्मणो अयं, श्यामो अयं इति।"
| विषय | निर्विकल्पक प्रत्यक्ष | सविकल्पक प्रत्यक्ष |
|---|---|---|
| स्वरूप | प्रकार-रहित ज्ञान | प्रकार-सहित ज्ञान |
| अवस्था | ज्ञान की प्रथम अवस्था | ज्ञान की द्वितीय अवस्था |
| विशेषता | केवल सामान्य आभास | नाम, गुण, जाति सहित पूर्ण ज्ञान |
| उदाहरण | "कुछ दिख रहा है" | "यह घोड़ा है, सफेद रंग का है" |
| अनुभव की आवश्यकता | नहीं | हाँ |
टिप: निर्विकल्पक → पहली अवस्था | सविकल्पक → अगली (परिपक्व) अवस्था
जब ये तीनों एक साथ ज्ञान में आएं - वही सविकल्पक प्रत्यक्ष है।
सविकल्पक प्रत्यक्ष
├── १. लौकिक सविकल्पक प्रत्यक्ष
│ ├── (क) बाह्य लौकिक प्रत्यक्ष
│ └── (ख) आभ्यंतर लौकिक प्रत्यक्ष
└── २. अलौकिक सविकल्पक प्रत्यक्ष
├── (क) सामान्य लक्षण
├── (ख) ज्ञान लक्षण
└── (ग) योगज
| ज्ञानेंद्रिय | महाभूत | ग्रहण किया गुण |
|---|---|---|
| आँख (चक्षु) | तेज | रूप (रंग/आकार) |
| कान (श्रोत्र) | आकाश | शब्द (ध्वनि) |
| नाक (घ्राण) | पृथ्वी | गंध |
| जीभ (रसना) | जल | रस (स्वाद) |
| त्वचा (स्पर्श) | वायु | स्पर्श |
| संनिकर्ष | अर्थ |
|---|---|
| १. संयोग | इंद्रिय का वस्तु से सीधा संपर्क (जैसे हाथ से छूना) |
| २. संयुक्त समवाय | इंद्रिय द्वारा वस्तु के गुण का ज्ञान (जैसे रंग देखना) |
| ३. संयुक्त समवेत समवाय | गुण के गुण का ज्ञान (जैसे रंग की तीव्रता) |
| ४. समवाय | शब्द और कान का संबंध (समवाय संबंध) |
| ५. समवेत समवाय | शब्द की जाति का ज्ञान |
| ६. विशेषण-विशेष्य भाव | अभाव का प्रत्यक्ष (किसी चीज़ की अनुपस्थिति जानना) |
Difference between nirvikalp and savikalp pratyaksh in hindi
"निर्विकल्पकं तु प्रकाररहितं ज्ञानम्"
"स प्रकारकं ज्ञानं सविकल्पकम्"
| क्र. | विषय | निर्विकल्पक प्रत्यक्ष | सविकल्पक प्रत्यक्ष |
|---|---|---|---|
| १ | अर्थ | विकल्प-रहित (बिना विशेषता) ज्ञान | विकल्प-सहित (विशेषता के साथ) ज्ञान |
| २ | प्रकार | प्रकार-रहित (Indeterminate) | प्रकार-सहित (Determinate) |
| ३ | ज्ञान की अवस्था | प्रथम अवस्था (पहला क्षण) | द्वितीय अवस्था (परिपक्व ज्ञान) |
| ४ | नाम का बोध | नहीं होता | होता है |
| ५ | गुण का बोध | नहीं होता | होता है |
| ६ | जाति का बोध | नहीं होता | होता है |
| ७ | अनुभव की आवश्यकता | नहीं - जन्मजात होता है | हाँ - पूर्व अनुभव आवश्यक |
| ८ | विशेष्य-विशेषण संबंध | नहीं होता | अवश्य होता है |
| ९ | संसर्ग | नहीं | तीनों (विशेष्य+विशेषण+संसर्ग) होते हैं |
| १० | शाब्दिक अभिव्यक्ति | शब्दों में व्यक्त नहीं होता | शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है |
| ११ | उदाहरण | "कुछ दिख रहा है" | "यह सफेद घोड़ा है" |
| १२ | तर्कसंग्रह मत | वस्तु-मात्र का आभास | वस्तु का पूर्ण विशिष्ट ज्ञान |
| १३ | व्यावहारिक उपयोग | कम - केवल आरंभिक बोध | अधिक - चिकित्सा, निदान, व्यवहार में |
| १४ | बच्चे में | नवजात को होता है | अनुभव के बाद विकसित होता है |
| १५ | योग से संबंध | अव्यक्त/इंद्रिय-स्तर तक | लौकिक + अलौकिक दोनों रूप |
निर्विकल्पक → "कोई हरी चीज़ दिख रही है"
↓
सविकल्पक → "यह गुड़ुची है, तिक्त है, पित्तशामक है"
निर्विकल्पक → "कोई है"
↓
सविकल्पक → "यह श्याम है, यह ब्राह्मण है"
निर्विकल्पक → "सामने कोई व्यक्ति है"
↓
सविकल्पक → "यह पाण्डु (पीलिया) रोगी है,
त्वचा पीली है, आँखें पीली हैं"
निर्विकल्पक = केवल "है" का बोध
सविकल्पक = "क्या है, कैसा है, कौन है" का बोध
"निर्विकल्पक ज्ञान की बीज है, सविकल्पक उसका फल है।"