Ajirna chikitsa and chikitsa yojna
Ajirna chikitsa yojna Ayurveda treatment plan indigestion
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शास्त्रीय संदर्भ: चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदयम्
| प्रकार | दोष | विशिष्ट लक्षण |
|---|---|---|
| आमाजीर्ण | कफ प्रधान | उदर गौरव (भारीपन), मतली, गालों-आँखों की सूजन, भोजन के तुरंत बाद जैसी डकार |
| विदग्धाजीर्ण | पित्त प्रधान | अम्लता, सीने में जलन, खट्टी डकार, प्यास |
| विष्टब्धाजीर्ण | वात प्रधान | आफरा/अफारा, पेट दर्द, मल-वायु अवरोध, भ्रम |
| रसशेषाजीर्ण | आहार रस का अपूर्ण पाचन | डकार, भारीपन, सुस्ती |
| दिनपाकी अजीर्ण | अगले दिन तक पाचन, कोई विशेष कष्ट नहीं | |
| प्राकृत अजीर्ण | सामान्य अवस्था - भोजन पाचन की प्राकृतिक प्रक्रिया |
| घटक | विवरण |
|---|---|
| दोष | कफादि त्रिदोष |
| दूष्य | अन्न, रस |
| स्रोतस् | अन्नवह, रसवह, पुरीषवह |
| स्रोतोदुष्टि | संग (अवरोध) |
| उद्भवस्थान | आमाशय |
| अग्नि | जठराग्नि मांद्य |
| चिकित्सा | उद्देश्य | उदाहरण |
|---|---|---|
| दीपन | जठराग्नि प्रदीपन | हिंग्वष्टक चूर्ण, चित्रकादि वटी |
| पाचन | आम का पाचन | आम-पाचन द्रव्य |
| वातानुलोमन | वात की अनुलोम गति | हरीतकी, हिंग्वादि |
| अजीर्ण का प्रकार | पंचकर्म |
|---|---|
| आमाजीर्ण (कफ प्रधान) | वमन कर्म (चिकित्सकीय वमन) |
| विदग्धाजीर्ण (पित्त प्रधान) | विरेचन कर्म (चिकित्सकीय विरेचन) |
| विष्टब्धाजीर्ण (वात प्रधान) | बस्ति कर्म (औषधयुक्त एनिमा) |
| क्या लें | क्यों |
|---|---|
| लघु, उष्ण, सुपाच्य आहार | अग्नि को सहायता |
| पुराना शाली चावल, मूंग | सुलभ पाचनीय |
| अदरक, जीरा, हींग | दीपन-पाचन |
| उष्ण जल | आम-पाचन |
| अर्धसंतृप्त भोजन (आधा ठोस, चौथाई तरल, चौथाई रिक्त) | वात की गति के लिए |
अजीर्ण निदान
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निदान परिवर्जन (कारण हटाएं)
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लंघन (अग्नि प्रदीपन हेतु उपवास)
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दीपन-पाचन औषधि (आम पाचन)
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[दोष के अनुसार]
कफ → वमन | पित्त → विरेचन | वात → बस्ति
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पथ्य-अपथ्य + जीवनशैली सुधार
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दीपन चिकित्सा (अग्नि सुदृढ़ीकरण)