Adrita chikitsa sutra with shlok

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Adrita Chikitsa Sutra shlok Sanskrit Ayurveda

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अदृष्ट चिकित्सा सूत्र श्लोक आयुर्वेद

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https://www.ijfmr.com/papers/2024/5/29264.pdf

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Daiva Vyapashraya Chikitsa Sutra shlok Charaka Samhita Adrishta

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https://dharmawiki.org/index.php/Daivavyapashraya_Chikitsa_(…

I now have rich information to provide a thorough answer. Note: "Adrita Chikitsa" is the colloquial/regional pronunciation of Adrishta Chikitsa (अदृष्ट चिकित्सा), which is the same as Daiva Vyapashraya Chikitsa (दैवव्यपाश्रय चिकित्सा) in Ayurveda. "Adrishta" literally means "unseen/invisible" and refers to the invisible fruits of past karma (Daiva = past karmic deeds).

अदृष्ट / दैवव्यपाश्रय चिकित्सा सूत्र (Adrishta / Daiva Vyapashraya Chikitsa Sutra)

परिचय (Introduction)

In Ayurveda, Adrishta Chikitsa (अदृष्ट चिकित्सा) is another name for Daiva Vyapashraya Chikitsa - the therapy based on the unseen/divine forces. The commentator Chakrapani explicitly states: "Daiva means Adrishta" (दैव = अदृष्ट). These are diseases whose root cause lies in Purva Janma Karma (deeds of past lives) - hence beyond ordinary physical therapy.

मूल श्लोक (Main Shlokas)

१. तीन प्रकार की चिकित्सा - चरक संहिता सूत्र स्थान १/५८

संस्कृत:
प्रशाम्यत्यौषधैः पूर्वी दैवयुक्तिव्यपाश्रयैः । मानसो ज्ञानविज्ञानधैर्यस्मृतिसमाधिभिः ॥५८॥
अर्थ (Meaning):
  • शारीरिक दोष (Vata, Pitta, Kapha) - Daiva Vyapashraya Chikitsa और Yukti Vyapashraya Chikitsa से शान्त होते हैं।
  • मानसिक दोष (Rajas, Tamas) - ज्ञान, विज्ञान, धैर्य, स्मृति, और समाधि से शान्त होते हैं (Sattvavajaya Chikitsa)।
(Charaka Samhita, Sutra Sthana, Adhyaya 1, Shloka 58)

२. दैवव्यपाश्रय चिकित्सा के अंग - चरक संहिता सूत्र स्थान ११/५४

संस्कृत:
तत्र दैवव्यपाश्रयं- मन्त्रौषधिमणिमङ्गलबल्युपहारहोमनियमप्रायश्चित्तोपवाससस्त्व्ययनप्रणिपातगमनादि, युक्तिव्यपाश्रयं- पुनराहारौषधद्रव्याणां योजना, सत्त्वावजयः- पुनरहितेभ्योऽर्थेभ्यो मनोनिग्रहः ॥५४॥
(Char. Samh. 11.54)
अर्थ:
  • दैवव्यपाश्रय चिकित्सा = मन्त्र, औषधि, मणि, मंगल, बलि, उपहार, होम, नियम, प्रायश्चित्त, उपवास, स्वस्त्ययन, प्रणिपात, गमन आदि।
  • युक्तिव्यपाश्रय चिकित्सा = आहार एवं औषधि द्रव्यों का उचित योजन।
  • सत्त्वावजय चिकित्सा = अहितकर विषयों से मन का निग्रह।

३. दैवव्यपाश्रय चिकित्सा के घटक - चरक संहिता सूत्र स्थान ८/८७

संस्कृत:
तत्रदैवव्यपाश्रयं मन्त्रौषधिमणिमङ्गलबल्युपहारहोमनियमप्रायश्चित्तोपवाससस्त्व्ययनप्रणिपातगमनादि ।
(Char. Samh. 8.87)
अर्थ: दैवव्यपाश्रय चिकित्सा में निम्न उपाय सम्मिलित हैं:
अंगअर्थ
मन्त्रपवित्र श्लोकों/स्तोत्रों का पाठ
औषधिविशेष वनस्पतियों को धारण करना
मणिरत्न-पत्थर धारण करना
मंगलशुभ कार्य करना
बलिदेवताओं को बलिदान/अर्पण
उपहारभेंट/समर्पण
होमयज्ञ/अग्निहोत्र
नियमअनुशासन/व्रत पालन
प्रायश्चित्तपश्चाताप/पाप-मुक्ति के उपाय
उपवासउपवास/व्रत
स्वस्त्ययनमंगल-मंत्र पाठ
प्रणिपातईश्वर के सम्मुख नमस्कार/समर्पण
गमनतीर्थ-यात्रा

४. चक्रदत्त टीका - अदृष्ट/दैव की व्याख्या

संस्कृत:
दैवमदृष्टं तद्व्यपाश्रयं, तच्च यददृष्टजन्नेन व्याधिप्रत्यनीकं मन्त्रादि; यदि वा दैवशब्देन देवा उच्यन्ते, तानाश्रित्य यदुपकरोति तत्तथा; मन्त्रादयो हि देवप्रभावादेव व्याधिहराः, बल्युपहारादिप्रीताश्च देवा एव प्रभावाद्व्याधीन् घ्नन्ति।
(Chakradatta Commentary on Chara. Samh. 11.54)
अर्थ: "दैव" का अर्थ है "अदृष्ट" (अदृश्य/अज्ञात)। इस पर आश्रित चिकित्सा वह है जो अदृष्ट कारणों से उत्पन्न व्याधियों का प्रतिकार मन्त्र आदि के द्वारा करती है। देव-प्रभाव से ही मन्त्र आदि रोग-नाशक होते हैं।

तीन प्रकार की चिकित्सा का सारांश

चिकित्सा के तीन प्रकार (Char. Samh. 11.54)
├── 1. दैवव्यपाश्रय / अदृष्ट चिकित्सा → कर्मज/दैवज रोगों के लिए
├── 2. युक्तिव्यपाश्रय चिकित्सा → दोषज रोगों के लिए (आहार-औषधि)
└── 3. सत्त्वावजय चिकित्सा → मानस रोगों के लिए (मन-निग्रह)

महत्त्वपूर्ण बिन्दु

  • अदृष्ट (Adrishta) = वह कारण जो दिखाई नहीं देता = पूर्वजन्म का कर्म = दैव
  • चक्रपाणि के अनुसार दैव = अदृष्ट; अतः दैवव्यपाश्रय चिकित्सा = अदृष्ट चिकित्सा
  • यह मुख्यतः कर्मज व्याधियों (diseases caused by past-life karma) में प्रयुक्त होती है
  • दोषज रोगों में भी युक्तिव्यपाश्रय के साथ सहायक रूप में इसका प्रयोग होता है
  • Atharvaveda और कौशिकसूत्र - ये दोनों दैवव्यपाश्रय चिकित्सा के प्राचीनतम स्रोत माने जाते हैं
  • आचार्य चरक ने इसे तीनों प्रकारों में प्रथम स्थान दिया क्योंकि यह रोगी को बिना कष्ट दिए तुरन्त फल देती है
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